यात्रा वृतांत 👌🚂 (28.April.2019)
रविवार का दिन था सुबह जल्दी से उठ कर नास्ता कर के अभी आराम ही कर रहा था कि देखा मौसम सुहाना हो गया है ।
प्रायः हमेशा 40-45°सेल्सियस भीषण गर्मी रहती है , मन किया कि चलता हुँ अकेले शहर घुमने थोङा डर भी लग रहा था कि कही खो ना जाउ , फिर किसी तरह मन बना के निकल पङा घुमक्कड़ी पर अपने निवास स्थान Chintal से निकल कर Suchitra X Roads से Apsrtc के बस से Bharatnagar Railway Station तक का टिकट कटा लिया।
चूँकि बस मे सभी अनजान तथा तेलगु भाषी थे इसलिये मै किसी से कुछ सहायता लिये बगैर ही #भरतनगर का बस स्टाप देखने एवं सोचने लगा अचानक कुछ देर बाद कंडक्टर ने इशारा किया मैने बोला भरतनगर उतरना अन्ना तो उसने कहा कि वो तो बहुत पीछे गया अब मै एकदम परेशान हो गया।
अतंतः मै JNTU Metro Station पहुँच गया था। प्रायः मै घुमने जाता तो धन पर्याप्त रहने पर भी खर्च करने से कंजूसी करता ,😆 सोच रहे थे कि क्यु ना एक जुगाङ करू मै पाँच स्टेशन आगे आ गया था मेट्रो का किराया 40 रुपये था , मै सोच रहा था क्यु ना दो स्टेशन का किराया दे के पाँच स्टेशन की दुरी तय हो जाये अभी मे मेट्रो से अनजान था कि मुझे अपने बचपन के मित्र Prakhar Tiwari की याद आ गई उसने Delhi Metro मे खुब सफ़र किया था मैने अपनी सारी बात बताई और कहा कि क्या ये जुगाड़ सम्भव है उसने कहा हा सम्भव हो सकता है अतः
मै चल दिया अपने theory's को practical करने और 25₹ का #HyderabadMetro का टिकट कटा कर चढ़ा (bharatnagar metro $tation) पहुँच गया मुझे एक ब्लू प्लास्टिक सिक्का मिला था उतरते ही मैने झट से निकास द्वार के समीप मशीन मे सिक्का डाला वह reject हो जा रहा दो -तीन बार प्रयास किया नही हुआ तब प्रखर को समपर्क किया और कहा भाई प्लान मेरा फेल हो गया उसने फिर नया तरकिब बताया लेकिन मै अपने वाली कर के एक बार और सिक्का डाला बगल मे कस्टमर केयर वाला बुला दिया बोला कहा जाना मैने उसे अपना फर्जी स्टेशन बताया ।
उसने कहा यही टिकट ले के वापस चले जाओ चुकि मुझे उतरना तो वही था so मैने कहा नही जब यहा उतर गये है तो अब हम नीचे जायेंगे तो बोला 15₹और दो दे के मै नया टिकट बनवा के मशीन मे डाला चूँकि आंध्रप्रदेश के लोग बङी अनुशासित रहते है उसमे मै ही अनुशासनहीन था 😆😆😆 नीचे उतर कर Buddha Statue of Hyderabad की ओर चल दिया रास्ते मे मै प्रदेश की साफ -सुथरी सङके उपर बनी मेट्रो और अनुशासित लोगों को देख रहा था और अपने #कसयाढाला के बारे मे सोच रहा था इससे उसको tally kiyea 🤣🤣🤣 ।
चूँकि मे अकेले ही चला था इसलिये जब जहाँ मन करता चल दिया धीरे-धीरे Hussian Sagar Lake, Hyderabad. आ गया
अब पुरा VIP AREA आ गया हुसैन झील के किनारे दो लेन वाली चौङी सङक और फुटपाथ के बगल मे NTR Gardens भी था अभी थोडी धुप हो गई थी अतः मै कुछ समय पार्क मे बिताकर 2:00pm पे बुद्ध प्रतिमा धुम कर 1.8km की दुरी पर Birla Mandir, Hyderabad था वहाँ पर पैदल चल दिया ।
""मै अक्सर देखता हूँ लोग कुछ ही दूरी के लिये CABS या ऑटोरिक्शा कर लेते है , वास्तविकता तो यह है कि शहरीकरण की सुविधाएं जितनी ही कार्य को आसान बना रही है व्यक्ति उतना ही बिमार होता जा रहा है , मेरा मानना है कि पैदल चलने से शरीर तो ठीक रहता ही है साथ - साथ जिन रास्तो से हम गुज़रते है वे अक्सर अच्छे से याद हो जाते है , और ये बात सत्य है कि जीवन मे योग्यता से बङा अनुभव काम आता है । हो सके तो आप भी आजमा के देख लेना ।""
......... बिरला मंदिर पहुँचने के बाद मेरा मोबाइल जमा हो गया । चुकि मंदिर काफी उँचाई पर है अतः चढने के बाद मंदिर के रेलिंग पर से देखने पर पुरा हैदराबाद की बङी-बङी इमरते छोटी लगने लगती है और बहुत अदभुत दृश्य रहता है , यह सब देखने के बाद मै मंदिर के ईश्वर वैंकटेश्वर जी के प्रतिमा के पास पहुँचता हुँ ।
अब शाम हो गई रहती है (शाम का नजारा बहुत-बहुत अदभुत लगता है ) अतः मै नीचे उतर कर अपना सामान ले कर मंदिर के पास वाले स्टेशन Lakdi ka pul के पास पहुँचता हुँ और मैट्रो के बजाय लोकल ट्रेन (MMTS)पकङ कर फ्रि मे भरतनगर उतर कर बस से अपने गंतव्य स्थान पर पहुँच गया ।
इस पुरे यात्रा मै Google Maps का प्रयोग किया , इस बेहतर एवं यादगार यात्रा मे सहयोग के लिये Google का बहुत-बहुत धन्यवाद ।
वृत्तांत कैसा लगा कमेंट्स कर के जरुर बताये ।
धन्यवाद ।
INTERESTED IN:- Incredible India( #अतुल्यभारत )https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=657853807998228&id=100013208436684
रविवार का दिन था सुबह जल्दी से उठ कर नास्ता कर के अभी आराम ही कर रहा था कि देखा मौसम सुहाना हो गया है ।
प्रायः हमेशा 40-45°सेल्सियस भीषण गर्मी रहती है , मन किया कि चलता हुँ अकेले शहर घुमने थोङा डर भी लग रहा था कि कही खो ना जाउ , फिर किसी तरह मन बना के निकल पङा घुमक्कड़ी पर अपने निवास स्थान Chintal से निकल कर Suchitra X Roads से Apsrtc के बस से Bharatnagar Railway Station तक का टिकट कटा लिया।
चूँकि बस मे सभी अनजान तथा तेलगु भाषी थे इसलिये मै किसी से कुछ सहायता लिये बगैर ही #भरतनगर का बस स्टाप देखने एवं सोचने लगा अचानक कुछ देर बाद कंडक्टर ने इशारा किया मैने बोला भरतनगर उतरना अन्ना तो उसने कहा कि वो तो बहुत पीछे गया अब मै एकदम परेशान हो गया।
अतंतः मै JNTU Metro Station पहुँच गया था। प्रायः मै घुमने जाता तो धन पर्याप्त रहने पर भी खर्च करने से कंजूसी करता ,😆 सोच रहे थे कि क्यु ना एक जुगाङ करू मै पाँच स्टेशन आगे आ गया था मेट्रो का किराया 40 रुपये था , मै सोच रहा था क्यु ना दो स्टेशन का किराया दे के पाँच स्टेशन की दुरी तय हो जाये अभी मे मेट्रो से अनजान था कि मुझे अपने बचपन के मित्र Prakhar Tiwari की याद आ गई उसने Delhi Metro मे खुब सफ़र किया था मैने अपनी सारी बात बताई और कहा कि क्या ये जुगाड़ सम्भव है उसने कहा हा सम्भव हो सकता है अतः
मै चल दिया अपने theory's को practical करने और 25₹ का #HyderabadMetro का टिकट कटा कर चढ़ा (bharatnagar metro $tation) पहुँच गया मुझे एक ब्लू प्लास्टिक सिक्का मिला था उतरते ही मैने झट से निकास द्वार के समीप मशीन मे सिक्का डाला वह reject हो जा रहा दो -तीन बार प्रयास किया नही हुआ तब प्रखर को समपर्क किया और कहा भाई प्लान मेरा फेल हो गया उसने फिर नया तरकिब बताया लेकिन मै अपने वाली कर के एक बार और सिक्का डाला बगल मे कस्टमर केयर वाला बुला दिया बोला कहा जाना मैने उसे अपना फर्जी स्टेशन बताया ।
उसने कहा यही टिकट ले के वापस चले जाओ चुकि मुझे उतरना तो वही था so मैने कहा नही जब यहा उतर गये है तो अब हम नीचे जायेंगे तो बोला 15₹और दो दे के मै नया टिकट बनवा के मशीन मे डाला चूँकि आंध्रप्रदेश के लोग बङी अनुशासित रहते है उसमे मै ही अनुशासनहीन था 😆😆😆 नीचे उतर कर Buddha Statue of Hyderabad की ओर चल दिया रास्ते मे मै प्रदेश की साफ -सुथरी सङके उपर बनी मेट्रो और अनुशासित लोगों को देख रहा था और अपने #कसयाढाला के बारे मे सोच रहा था इससे उसको tally kiyea 🤣🤣🤣 ।
चूँकि मे अकेले ही चला था इसलिये जब जहाँ मन करता चल दिया धीरे-धीरे Hussian Sagar Lake, Hyderabad. आ गया
अब पुरा VIP AREA आ गया हुसैन झील के किनारे दो लेन वाली चौङी सङक और फुटपाथ के बगल मे NTR Gardens भी था अभी थोडी धुप हो गई थी अतः मै कुछ समय पार्क मे बिताकर 2:00pm पे बुद्ध प्रतिमा धुम कर 1.8km की दुरी पर Birla Mandir, Hyderabad था वहाँ पर पैदल चल दिया ।
""मै अक्सर देखता हूँ लोग कुछ ही दूरी के लिये CABS या ऑटोरिक्शा कर लेते है , वास्तविकता तो यह है कि शहरीकरण की सुविधाएं जितनी ही कार्य को आसान बना रही है व्यक्ति उतना ही बिमार होता जा रहा है , मेरा मानना है कि पैदल चलने से शरीर तो ठीक रहता ही है साथ - साथ जिन रास्तो से हम गुज़रते है वे अक्सर अच्छे से याद हो जाते है , और ये बात सत्य है कि जीवन मे योग्यता से बङा अनुभव काम आता है । हो सके तो आप भी आजमा के देख लेना ।""
......... बिरला मंदिर पहुँचने के बाद मेरा मोबाइल जमा हो गया । चुकि मंदिर काफी उँचाई पर है अतः चढने के बाद मंदिर के रेलिंग पर से देखने पर पुरा हैदराबाद की बङी-बङी इमरते छोटी लगने लगती है और बहुत अदभुत दृश्य रहता है , यह सब देखने के बाद मै मंदिर के ईश्वर वैंकटेश्वर जी के प्रतिमा के पास पहुँचता हुँ ।
अब शाम हो गई रहती है (शाम का नजारा बहुत-बहुत अदभुत लगता है ) अतः मै नीचे उतर कर अपना सामान ले कर मंदिर के पास वाले स्टेशन Lakdi ka pul के पास पहुँचता हुँ और मैट्रो के बजाय लोकल ट्रेन (MMTS)पकङ कर फ्रि मे भरतनगर उतर कर बस से अपने गंतव्य स्थान पर पहुँच गया ।
इस पुरे यात्रा मै Google Maps का प्रयोग किया , इस बेहतर एवं यादगार यात्रा मे सहयोग के लिये Google का बहुत-बहुत धन्यवाद ।
वृत्तांत कैसा लगा कमेंट्स कर के जरुर बताये ।
धन्यवाद ।


Comments
Post a Comment