UNEXPECTED LOVES

                       UNEXPECTED LOVES 


कहते है भगवान जो करता है शायद भले के लिए ही करता है , पर शायद मेरे इस जीवन मे क्या भला हो रहा है मै खुद नहीं समझ पा रहा हुँ ।
हर बात की कभी शुरूआत होती है ,तो या तो वह किसी घटना अधारित होती है या तो किसी और चीज़ से।
मेरी भी ये बात लिखने की एकमात्र वजह मेरी प्यारी NK ( Butki ,पारो ) ही है , शायद कोई ऐसा दिन नही गया होगा जिस दिन मै अपनी इस प्यारी सी Butki के बारे मे सोचा न हो , हर पल उसको अपने दिलों-दिमाग मे बसाये रहते है ।
दिनांक 16/10 2019 को मै शाम को 6 बजे से पढने बैठा था मन हमेशा उसको याद कर के भावुक हो जाता है उस दिन भी यहीं हुआ फिर किसी तरह थोङा मन मारकर FINANCIAL STATEMENTS AND ANALYSES की किताब ले कर Ratio का प्रश्न हल करने बैठा सवाल समझते हल करते बज गये 12:30 ( ऐसा मत सोचना की 6 से 12 मै बैठा रहा पढ़ने ही बीच बीच मे उठ कर खाना भी खाया 😂 और शायद मेरी Butki मेरे जीवन मे नहीं आती तो शायद कंसंट्रेसन इतनी देर बन पाता ) , सवाल लगा के अभी उठा तो चादर ओढ के सोने ही वाला था की उसकी फिर याद आ गई ,।
तभी मुझें मेरी दीदी की बाते याद आ गई और मेरा भी मन बोला की मुझे "प्यार दिल से हुआ है ,कि दिमाग से "
अब जब बाते हो ही रही है तो पुरी बात बता ही देते है ,

                        




यह बात उन दिनों की है जब मेरी छोटी दीदी जो काशी हिन्दु विश्वविद्यालय से पढ कर दिल्ली से NET JRF (Physics ) QUALIFY कर के आई थी और उसका तैयारी बी• एच• यु •
मे प्रोफेसर की थी , अभी रिजल्ट आने बाकी थे और कुछ और भी प्रक्रिया थी तो लगभग 4-5 महीने देवरिया आ गई । चुकि घर मे सभी लोग वैकल्पिक सोच वाले है ,इसी कारण पिताजी उसका नाम बी•टी•सी• मे करा दिये और उसका अंक सबसे अधिक होने के कारण उसको रामपुर सरकारी डायट मिला , पापा कहते थे उसको कि मान ले तोके हउ वाला नौकरी ना मिली त ई 40-50 हजार वाला आराम से मिल जाई । अतः वह चली गई क्लास करने । 


           


दीदी और हम दोनों लोग एक साथ शाम को पढने बैठते थे । मै रोज 1बजे से 4 बजे तक लगभग सोता था , और अभी भी वही हाल है , उस दिन जब मै उठा तो हम सब लोग शाम को छत पर गये और छोटी दीदी अपनी कालेज के दिनो को बता रही थी , वह एसे अपनी बातो को प्रभावी रूप से बताती थी कि सच मानो तो मै इस प्रकार उसकी बातो मे खो जाता था की जैसे मै भी बी•एच• यु• के कैम्पस मे हु। उसखे बाद मन फ्रेस हो गया अब पढ़ने बैठे हमलोग,

       




अभी बैठे महज आधा घंटा हुआ होगा की वो बोल पङी :- आशु ये बताओ की प्यार दिल से होता की दिमाग से ते कुछ अच्छा सोच के बताउ काहे की हमके पुरा क्लास के सामने ई बोले के बा ।
हम भी थोङा लजा गये 😂 और कहे हमसे का पुछताङे हम का बताई तोके ।
( चूंकि उसको यही टाँपिक मिला था उस दिन डायट से ) ,
मै तो आंशिक आवारा अपने Butki की याद मे सो बोल दिये की प्यार दिल से होला ।
तब दीदी बोली चल अगर हम मान ले तनी प्यार दिल से होला त ई बताउ अगर तोरी लगे दीमाग न रहे त तु केहुके पहचान पईबे की के माँ ह , के बाप ,के तोर दोस्त तब हम बोले ना दीदी ना पहचान पाईब ।
तब जाकर मन मे यह भाव आया सच मे प्यार दिमाग से ही होता है क्युकि दिमाग से ही हर इंसान के भाव किसी को पहचानने की गुण , सही- गलत ये सारे कार्य दिमाग से ही किये जाते है , और
मै भी अपनी NK ( Butki ) को शायद दिमाग से ही पसंद किया था तभी तो उसके सारे कार्य मुझे न्यायपुर्ण तरीके से अच्छे लगते है , वह इतनी सुन्दर सुशील है ये भी भाव तो दिमाग ने भेजा है , फिर अचानक मै घचपचा गया कि साला तब दिल क्या होता , 
मुझे इसका प्रतिउत्तर यही मिला कि दिल एक शरीर का ऐसा अनमोल चीज़ है जिसकी तुलना कुछ करीबी या चाहनेवालों के लिये लोग उससे कर देते है जैसे :- दिल से चाहना अर्थात बात को और प्रभावी बना देते है ।

फिर कभी सोचते है कि दीदी भी तो एक छात्र ही थी उसने कितना त्याग किया होगा। वो ये सब त्याग कर कैसे इतनी बड़ी मुकाम तक पहुंची है यही सब बात सोच कर फिर पढने बैठ जाता , लेकिन इस समय दीदी मेरे पास नहीं है कि मेरा समय गप्पे मे डायवर्ट हो और मै अपनी बुटकी को भुल जाउँ ।
मेरे पास जब भी समय रहता है अपनी बुटकी की हमेशा याद आती रहती है।
               
मन करता है वो भी कभी इस बात को पढ ले और समझ जाये की उससे कितना प्यार है हमको उससे कुछ नहीं चाहिए बस वो हमसे बात किया करे यही काफी है उसका एक दिन न आना मुझे महिने बराबर लगता है ।
शायद वह इस बात को नही समझ पायेगी ।
, लेकिन शायद यह सम्भव नहीं , 😭
अपनी NK को कभी अपनी भावनाएं बताने या कहने से भी बहुत डर लगता है चुकि वह बहुत कम बोलती है और क्लास मे इतना बेमतलब का अपना डर बना दी है की कोई कुछ कहे भी तो कैसे यानी अब तो घुट - घुट के ही जीना पङेगा लगता है ।
                  बिना तुम्हरे  कसम से एक पल रह ना पाये,
              चाहा बहुत था कहना पर हम कह ना पाये ,
                करते है तुमसे बहुत  प्यार  सनम ।।😓
उसकी जब तबियत खराब रहती है तो सोचता हुँ की भगवान उसके सारे दुःख मुझे दे दो कम से कम जीतने दिन है उतने दिन तो उसको बिमार नहीं देखना चाहते । हमेशा उसकी याद मे कुछ पंक्ति लिखता हुँ ।
           

         मत फेक कंकड़ पानी मे , उसे भी क़ोई पीता होगा ,
मत रह युँ ही उदास तु , तुझे देख कर भी कोई जीता होगा ।

Comments

  1. आपकी प्रेम कहनी कब सफल होगी

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  2. आप अपने प्रेमिका को क्यू बाया नहीं कर देते है नहीं तो आप ऐसे कहानी लिखते लिखते कही कवि और लेखक ना हो जाये

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  3. आज के ज़माने मैं हमने ऐसा प्यार नहीं देखा था नहीं तो आज कल के आशिक बस हवश पूरा करने के लिए प्यार करते है

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    1. One off the best true love..bt why r u not express ur feeling with her bro

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    2. Dear ,Reader
      Thanks a lot for reading my Story .
      As you have read, she seems to be a very disciplined girl, and I am not disciplined by nature. So I never able to said.

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    3. This comment has been removed by the author.

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  4. क्या भाई तुमने तो भावनाओ को अपनी कलम से प्रस्तुत के दिया😍😍भित अच्छा लिखे भाई

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