UNTOLD LOVE
UNTOLD LOVE STORY
यह बात है हमारे एकतरफा प्यार की चाहे इसे आप एक तरफा पसंद भी कर सकते है , जीवन मे हर एक इंसान अपने किशोरावस्था या एक समान्य वयक्ति भी किसी ना किसी को बहुत पसंद करता है और उसकी भी ख्वाईश होती है कि उसे पा जाये लेकिन वह बहुत भाग्यशाली ही होता है जिसे अपने चाहत की सभी चीजें प्राप्त हो जाती हैं ।
मै उस भाग्यशाली लोगो मे से नहीं हुँ इस बात का मै खुशी मनाऊँ या गम मुझे नहीं पता।
बात कहाँ से शुरू करूँ और कहाँ खत्म समझ मे ही नहीं आ रहा लेकिन फिर भी शुरू कर रहा हूँ ।😑
2017 मार्च- अप्रैल मे इंटरमीडिएट की परीक्षा दे कर मै 20 जुलाई 2017 को कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा की तैयारी करने पटना चला गया , वहाँ अंग्रेजी की कक्षा मे एडमिशन लिया और पठन- पाठन चालु कर दिया और बीच बीच मे खुब धुमता मन फिरता तो कभी पटना जंक्शन के पास जो बुद्ध पार्क है वहां चला जाता, कभी-कभी पटना साहिब, गांधी मैदान, और भी बहुत जगह, दिसंबर का महीना आते - आते और मेरे पास बी.कॉम प्रथम वर्ष का टेनियर आ गया, अब मेरे सामने ( दो नाव पे चढ़ना गाङ फाङ के मरना जैसी हालात हो गई थी😂 ) क्या पढे क्या छोङे ,गृहकार्य भी नहीं पुरा हो पा रहा था किसी तरह ढहते - ढीमलाते आ गया परीक्षा और पहुँच आया पुरा साजो- सामान ले के देवरिया ।
परीक्षा दिया और CCC की भी फार्म भर दी जिसकी परीक्षा 6 जुलाई को 2018 दे दी और रास्ते मे आते वक्त सोचे कि अब सारा पढ़ाई कर के कहीं जाना होगा तो जायेंगे । अतः शाम को ही सर से जा के मुलाकात कर के 7 से ज्वाईन कर लिये कोचिंग।
कोचिंग मे मै सिर्फ पहला दिन था अतः सिर्फ एक कापी ले के पहुँचा था , सर पढ़ाई शुरू किये तभी एक लङकी ने मुझे अपनी किताब कुछ देर के लिये बिना कहे पढ़ने के लिए दे रही थी मै भी झिझकते हुये किसी तरह ले लिये और अंत मे उसको वापस कर दि धन्यवाद के साथ , पहले दिन तो मुझे ज्यादा कुछ नहीं अच्छा लगा लेकिन धीरे-धीरे सर का पठन-पाठन मुझे अच्छा लगने लगा , और मै पीछे से आगे बैठने लगा ।
तभी मुझे आगे बैठी एक बहुत ही खुबसूरत लङकी दिखी मै थोडा नजरअंदाज कर रहा था चुकि नंबर मेरा कम था और समय और दिमाग इसमे लगाना मुझे नकारा सा लग रहा धीरे-धीरे दिन बीतते गये मै उसके हाव -भाव को समझता गया , वो लङकी मुझे पुरे दिलों- दिमाग से बहुत अच्छी लगी , मन बार - बार करता इससे खुब बाते करूँ ।
चूंकि हर एक वयक्ति की ख्वाईश होती है कि जो भी पसंद आये वो मिल जाये , हमको भी ऐसा ही महसूस हुआ ,
फिर अचानक मुझे पता चला कि उसका धर्म अलग है जिस धर्म से मै सबसे ज्यादा नफ़रत कर रहा उसका ताल्लुकात उसी धर्म से था , अतः उस पर फिर फोकस करना बंद कर दिया, चूंकि दिल है कि मानता नहीँ उसका कम बोलना, लेकिन प्रभावी बोलना , और अच्छे कार्य आराम से आती पढ़ कर चलीं जाती मुझें बहुत अच्छी लगी , और उसको देखकर कभी मन करता कि सच में एसी लङकी के साथ पूरा जीवन भी दे दो तो वो भी कम पङ जायेगा । इसको सोचते तो लगता है :-
1# अजीब है ये जिन्दगी---- जो चाहा कभी पाया नही , और जो पाया वो संभाला जाता नहीं ।
2# दिल मे हो तुम , सांसो मे तुम पहली नजर से ही यारा।
( हमेशा कोई लङकी देखता तो उसके चाल ढाल देखकर मन हर बार रंडी कह देता हम नहीं कहते 😂😂😂 , लेकिन इस प्रकार के भी महान लोग हमारे समूहों मे है , क्योकि एसे लोग भी तो हमारे ही समाज़ से ही तो निकलते है न । ! )
वक्त चलतें गया तभी कोचिंग मे एक कांड भी हो गया चूंकि हम सभी लङके विद्या मंदिर के कर्मकांडी होनहार बालक थे , इसी कारण कांड काफी प्रभावी था और
उस कांड का निपटारा भी हम ही किये उस वक्त भी वो कुछ नहीं बोली मै उसको नोटिस कर रहा था , मुझे उसकी यह भी आदतें अच्छी लगीं कि वो दूसरों कि बातों मे अड़ंगा नही लगाती न ही कुछ कहती । सच मे भगवान ने उसको बनाने मे कोई कसर नहीं छोङा होगा ।
सच कहूँ तो मेरे जीवन मे यही एक लडकी थी जिसके बारे मे मन से कभी उटपटांग बाते चाहे गलत शब्द नहीं निकला और शायद आप अगर किसी से प्यार करते हो तो उससे प्यार से ज्यादा उसकी इज्जत करते हो मुझे भी लगा की मुझे सच मे प्यार हो ही गया है लेकिन मै करता भी तो क्या !
फिर मै अपने उस सपनें को याद कर के चाणक्य वाली बाते याद कर , कभी-कभी चाणक्य नीति का युट्यूब पर विडियो देख मन बहला लेता और सोचता कि जब एक अधिकारीक पद हो जायेगा और रुतबा रहेगा तो उसका हाँथ मांगने मे कोई झिझक नहीं होगा ।
, लेकिन सच तो आखिर सच ही होता कब तक छिपेगा । तभी अचानक यही सब सोचते करते द्वितिय वर्ष की परीक्षा का समय आ गया सभी यह सोच कर दुखी होने लगे कि अब पता नही 3rd मे साथ होंगे कि नहीं , तभी एक खबर आई की वो तृतीय वर्ष हमलोग के साथ नहीं पढेगी कहीं और चली जायेगी ।😥😥
मन बहुत दुःखी हो रहा था फिर सोचे वो जहाँ जायेंगी वहीं हम भी चले जायेंगे मेरा मकसद उससे पाने का जुनून था और उसको खुबसूरत सी चेहरे को देख कर पढ़ना मुझे बहुत अच्छा लगता । उसके चाहत मे मैने लगभग 100 -200 बार JAZAKALLA वाली म्युजिक सुनी होगी ।
फिर मेरा अचानक प्लान बन गया हैदराबाद जाने का लगभग तीन -चार महीने तक रहा ।लेकिन जितने दिन रहा उतने दिन देवदास कि तरह अपने पारो को याद किया , चुकि वहां कि सभी लङकी सामान्य कपड़ों मे ही बहुत सुन्दर लगती थी सब , अतः मुझें भी मेरी पारो याद आ गई , क्युकि वो भी बहुत सामान्य रहती और शायद भगवान ने उसे एसे ही बनाया ही था कि उसे बाहरी सजावट कि कोई आवश्यकता ही न हो ।
इस बात कि मै अपने दोस्तो से भी चर्चा करता कोई कहता कि 1. अरे बोल दे आई लव यू , तो कोई कहता भाई तोर पर्सनैलिटी नईखे उ तोके हल्का मे लेई , कोई कहता भाई ते जब ते कहबे त उ चौंक जाई ,
अतः यह सब बाते सुनकर मन मे ही बाते रह जाती और बाहर नही निकलती मेरी स्थिति हुबहू वैसे ही हो रही थी जैसे पृथ्वी के अन्दर जैसे कोई भंयंकर उफान आ रहा हो और अचानक फुट जायेगा,
ख़ैर अब तृतीय वर्ष यानी अब अंतिम साल है मन कर रहा है उससे बात कर ही ले अगर नहीं होगा तो जीवन मे एक हमेशा के लिए अफसोस ही रहेगा और ईश्वर की मर्जी हो तो ये अफसोस - अफसोस मे ही रहेगा । कभी सोचते है कि काश कोई ऐसा चमत्कार होता कि मेरी बाते वो समझ जाती लेकिन अब वो सीता- राम वाली फीलिंग कहाँ । ..........
भावनाओं का अंत अभी नहीं हुआ जब पारो मिल जायेगी या चली जायेगी हमसे दूर
तो फिर कुछ अपने बारे मे लिखूंगा.......
उसके याद मे दो पंक्तियाँ :-
यह बात है हमारे एकतरफा प्यार की चाहे इसे आप एक तरफा पसंद भी कर सकते है , जीवन मे हर एक इंसान अपने किशोरावस्था या एक समान्य वयक्ति भी किसी ना किसी को बहुत पसंद करता है और उसकी भी ख्वाईश होती है कि उसे पा जाये लेकिन वह बहुत भाग्यशाली ही होता है जिसे अपने चाहत की सभी चीजें प्राप्त हो जाती हैं ।
मै उस भाग्यशाली लोगो मे से नहीं हुँ इस बात का मै खुशी मनाऊँ या गम मुझे नहीं पता।
बात कहाँ से शुरू करूँ और कहाँ खत्म समझ मे ही नहीं आ रहा लेकिन फिर भी शुरू कर रहा हूँ ।😑
2017 मार्च- अप्रैल मे इंटरमीडिएट की परीक्षा दे कर मै 20 जुलाई 2017 को कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा की तैयारी करने पटना चला गया , वहाँ अंग्रेजी की कक्षा मे एडमिशन लिया और पठन- पाठन चालु कर दिया और बीच बीच मे खुब धुमता मन फिरता तो कभी पटना जंक्शन के पास जो बुद्ध पार्क है वहां चला जाता, कभी-कभी पटना साहिब, गांधी मैदान, और भी बहुत जगह, दिसंबर का महीना आते - आते और मेरे पास बी.कॉम प्रथम वर्ष का टेनियर आ गया, अब मेरे सामने ( दो नाव पे चढ़ना गाङ फाङ के मरना जैसी हालात हो गई थी😂 ) क्या पढे क्या छोङे ,गृहकार्य भी नहीं पुरा हो पा रहा था किसी तरह ढहते - ढीमलाते आ गया परीक्षा और पहुँच आया पुरा साजो- सामान ले के देवरिया ।
परीक्षा दिया और CCC की भी फार्म भर दी जिसकी परीक्षा 6 जुलाई को 2018 दे दी और रास्ते मे आते वक्त सोचे कि अब सारा पढ़ाई कर के कहीं जाना होगा तो जायेंगे । अतः शाम को ही सर से जा के मुलाकात कर के 7 से ज्वाईन कर लिये कोचिंग।
कोचिंग मे मै सिर्फ पहला दिन था अतः सिर्फ एक कापी ले के पहुँचा था , सर पढ़ाई शुरू किये तभी एक लङकी ने मुझे अपनी किताब कुछ देर के लिये बिना कहे पढ़ने के लिए दे रही थी मै भी झिझकते हुये किसी तरह ले लिये और अंत मे उसको वापस कर दि धन्यवाद के साथ , पहले दिन तो मुझे ज्यादा कुछ नहीं अच्छा लगा लेकिन धीरे-धीरे सर का पठन-पाठन मुझे अच्छा लगने लगा , और मै पीछे से आगे बैठने लगा ।
तभी मुझे आगे बैठी एक बहुत ही खुबसूरत लङकी दिखी मै थोडा नजरअंदाज कर रहा था चुकि नंबर मेरा कम था और समय और दिमाग इसमे लगाना मुझे नकारा सा लग रहा धीरे-धीरे दिन बीतते गये मै उसके हाव -भाव को समझता गया , वो लङकी मुझे पुरे दिलों- दिमाग से बहुत अच्छी लगी , मन बार - बार करता इससे खुब बाते करूँ ।
चूंकि हर एक वयक्ति की ख्वाईश होती है कि जो भी पसंद आये वो मिल जाये , हमको भी ऐसा ही महसूस हुआ ,
फिर अचानक मुझे पता चला कि उसका धर्म अलग है जिस धर्म से मै सबसे ज्यादा नफ़रत कर रहा उसका ताल्लुकात उसी धर्म से था , अतः उस पर फिर फोकस करना बंद कर दिया, चूंकि दिल है कि मानता नहीँ उसका कम बोलना, लेकिन प्रभावी बोलना , और अच्छे कार्य आराम से आती पढ़ कर चलीं जाती मुझें बहुत अच्छी लगी , और उसको देखकर कभी मन करता कि सच में एसी लङकी के साथ पूरा जीवन भी दे दो तो वो भी कम पङ जायेगा । इसको सोचते तो लगता है :-
1# अजीब है ये जिन्दगी---- जो चाहा कभी पाया नही , और जो पाया वो संभाला जाता नहीं ।
2# दिल मे हो तुम , सांसो मे तुम पहली नजर से ही यारा।
( हमेशा कोई लङकी देखता तो उसके चाल ढाल देखकर मन हर बार रंडी कह देता हम नहीं कहते 😂😂😂 , लेकिन इस प्रकार के भी महान लोग हमारे समूहों मे है , क्योकि एसे लोग भी तो हमारे ही समाज़ से ही तो निकलते है न । ! )
वक्त चलतें गया तभी कोचिंग मे एक कांड भी हो गया चूंकि हम सभी लङके विद्या मंदिर के कर्मकांडी होनहार बालक थे , इसी कारण कांड काफी प्रभावी था और
उस कांड का निपटारा भी हम ही किये उस वक्त भी वो कुछ नहीं बोली मै उसको नोटिस कर रहा था , मुझे उसकी यह भी आदतें अच्छी लगीं कि वो दूसरों कि बातों मे अड़ंगा नही लगाती न ही कुछ कहती । सच मे भगवान ने उसको बनाने मे कोई कसर नहीं छोङा होगा ।
सच कहूँ तो मेरे जीवन मे यही एक लडकी थी जिसके बारे मे मन से कभी उटपटांग बाते चाहे गलत शब्द नहीं निकला और शायद आप अगर किसी से प्यार करते हो तो उससे प्यार से ज्यादा उसकी इज्जत करते हो मुझे भी लगा की मुझे सच मे प्यार हो ही गया है लेकिन मै करता भी तो क्या !
फिर मै अपने उस सपनें को याद कर के चाणक्य वाली बाते याद कर , कभी-कभी चाणक्य नीति का युट्यूब पर विडियो देख मन बहला लेता और सोचता कि जब एक अधिकारीक पद हो जायेगा और रुतबा रहेगा तो उसका हाँथ मांगने मे कोई झिझक नहीं होगा ।
, लेकिन सच तो आखिर सच ही होता कब तक छिपेगा । तभी अचानक यही सब सोचते करते द्वितिय वर्ष की परीक्षा का समय आ गया सभी यह सोच कर दुखी होने लगे कि अब पता नही 3rd मे साथ होंगे कि नहीं , तभी एक खबर आई की वो तृतीय वर्ष हमलोग के साथ नहीं पढेगी कहीं और चली जायेगी ।😥😥
मन बहुत दुःखी हो रहा था फिर सोचे वो जहाँ जायेंगी वहीं हम भी चले जायेंगे मेरा मकसद उससे पाने का जुनून था और उसको खुबसूरत सी चेहरे को देख कर पढ़ना मुझे बहुत अच्छा लगता । उसके चाहत मे मैने लगभग 100 -200 बार JAZAKALLA वाली म्युजिक सुनी होगी ।
फिर मेरा अचानक प्लान बन गया हैदराबाद जाने का लगभग तीन -चार महीने तक रहा ।लेकिन जितने दिन रहा उतने दिन देवदास कि तरह अपने पारो को याद किया , चुकि वहां कि सभी लङकी सामान्य कपड़ों मे ही बहुत सुन्दर लगती थी सब , अतः मुझें भी मेरी पारो याद आ गई , क्युकि वो भी बहुत सामान्य रहती और शायद भगवान ने उसे एसे ही बनाया ही था कि उसे बाहरी सजावट कि कोई आवश्यकता ही न हो ।
इस बात कि मै अपने दोस्तो से भी चर्चा करता कोई कहता कि 1. अरे बोल दे आई लव यू , तो कोई कहता भाई तोर पर्सनैलिटी नईखे उ तोके हल्का मे लेई , कोई कहता भाई ते जब ते कहबे त उ चौंक जाई ,
अतः यह सब बाते सुनकर मन मे ही बाते रह जाती और बाहर नही निकलती मेरी स्थिति हुबहू वैसे ही हो रही थी जैसे पृथ्वी के अन्दर जैसे कोई भंयंकर उफान आ रहा हो और अचानक फुट जायेगा,
ख़ैर अब तृतीय वर्ष यानी अब अंतिम साल है मन कर रहा है उससे बात कर ही ले अगर नहीं होगा तो जीवन मे एक हमेशा के लिए अफसोस ही रहेगा और ईश्वर की मर्जी हो तो ये अफसोस - अफसोस मे ही रहेगा । कभी सोचते है कि काश कोई ऐसा चमत्कार होता कि मेरी बाते वो समझ जाती लेकिन अब वो सीता- राम वाली फीलिंग कहाँ । ..........
भावनाओं का अंत अभी नहीं हुआ जब पारो मिल जायेगी या चली जायेगी हमसे दूर
तो फिर कुछ अपने बारे मे लिखूंगा.......
उसके याद मे दो पंक्तियाँ :-
आगे सफ़र था ,पीछे हमसफ़र था,
रूकते तो सफ़र छुट जाता ,चलते तो हमसफ़र छुट जाता ।😑
मंजिल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी ,
ऐ दिल तु ही बता उस वक्त मै कहाँ जाता ।😘




Wah bhai kya love story h tum to lover boy ho gye ho mere dua h ki aapki prem kahani saphal ho jaye
ReplyDeleteबहुत-बहुत धन्यवाद भाई आपका
ReplyDeleteभगवान अगर चाहे तो सब मुमकिन है
आशिक़ हो तो आप।के जैसा
ReplyDeleteEk sacha ashiq
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